गुरुवार, 14 अक्टूबर 2010

विदयादछमी की छुभकामनाएं...

मैं 3 महीने की हो गई हूं... मम्मा ने 1 अक्तूबर छे ऑफिछ जॉइन कल लिया है... मम्मा नाइत छिफ्त कल लही हैं ताकि मेले छात दिन का ज्यादा छे ज्यादा छमय गुजाल छकें... लात को मैं पापा के पाछ लहती हूं... मैं उन्हें बिल्कुल तंग नहीं कलती... औल लैक्तोजेन पीकल छो जाती हूं... छुबह 9 बजे मम्मा आ जाती हैं... तब मैं उनके छाथ खूब थेलती हूं... मम्मा मुझे बहुत प्याल कलती हैं... मेला बहुत ध्यान लखती हैं... चाहे मैं कितना भी तंग कलुं... लो मुझे कभी किछी की गोद में नहीं दालतीं... उन्हें हल वक्त मेली चिंता छताती लहती है... ये मेली पहली दुर्गा पूजा है... मेले घल पल कलछ स्थापना हुई है... मुझे बहुत अच्था लग लहा है... आप छबको भी दुर्गा पूजा की छुभकामनाएं... अब मैं छोने जा लही हूं... कल तीका लगवाने जाना है... बाय बाय................फिल मिलेंदे.....................