शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

MAMMA'S LETTER TO HER DAUGHTER

MAMMA'S LETTER TO HER DAUGHTER----
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मम्मा ने देखे हैं तुम्हारे लिए ढेरों सपने, मेरे सपनों का मान रखना, अपने अधिकारों के प्रति हमेशा जागरुक रहना, लेकिन कर्तव्य निभाने में भी कभी पीछे मत हटना, लेकिन मम्मा चाहती है कि तुम्हारा नाम फॉलोवर्स में न हो, बल्कि लोग तुम्हें फॉलो करें, तुम शासित नहीं, शासक बनो.... नियम बनाने वालों में से तुम हो, नियम को मानने वालों में से नहीं... सपने हमेशा ऊंचे रखना और उन्हें पूरा करने का माद्दा भी रखना... जीवन में संभावनाएं अनंत हैं, जीवन के आकाश को नापने के लिए अपने पूरे पंख फैलाकर उस अनंत आकाश में उड़ना... कंजर्वेटिव मत होना, सोच अपनी व्यापक रखना... हमेशा सेल्फ इंडिपेंडेंट रहना... हमेशा कंस्ट्रक्टिव वे में आगे बढ़ना और अपने सपने पूरा करना... कभी गलत रास्तों पर चलकर सपनों को पूरा मत करना... हमेशा लॉन्ग कर्ट अपनाना... शॉर्टकट नहीं... शॉर्टकट तरीके से पाई गई खुशियों का वक्त भी बहुत शॉर्ट होता है...
                                   मेरी किसी भी गलत बात को केवल इसलिए मत मानना कि मैं तुम्हारी मां हूं... क्योंकि किसी गलत बात को प्रोटेस्ट करने का ये मतलब नहीं कि तुम सामने वाले कि बेइज्जती कर रही हो... लेकिन जब देखो कि कोई रास्ता नहीं है फिलहाल दूसरे की बात मानने के, क्योंकि हो सकता है कि अगर बात न मानो तो लोग तुम्हें नुकसान पहुंचाएं... तो उस वक्त बात मान लेना... लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रयासरत रहना... और उस विपरीत परिस्थिति से निकलने के लिए भी...
                                   साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाकर जैसे चाणक्य ने अपने शिष्य को विजय दिलाई... वैसे इन्हीं नीतियों का उपयोग कर हमेशा सफल होना...
                                   जो तुम्हारी रेसपेक्ट न करे... और हमेशा इस्तेमाल करने की चाहत रखे... जिसके साथ होने से तुम्हारी आंखों में बार-बार आंसू आएं... उस व्यक्ति को कभी भी स्वीकार मत करना... उसी व्यक्ति को अपने आस-पास रहने देना... जिसके आस-पास होने से तुम्हारा कॉन्फिडेंस बूस्ट अप हो... जो तुम्हें केवल मुस्कुराहट दे... जो तुम्हारे अस्तित्व पर हावी न होना चाहे... तुम्हारी मौलिकता को नष्ट न करे... तुम जैसी हो उसी रूप में तुम्हें स्वीकारे और प्यार भी करे... और सबसे इंपॉर्टेंट तुम्हारी केयर करे और इज्जत करे... तुम्हारे माता-पिता की परवरिश पर ऊंगली उठाने वाले... तुम्हारे कैरेक्टर पर ऊंगली उठाने वाले... तुम्हारी कैपेबिलिटिज पर ऊंगली उठाने वालों को अपने पास फटकने मत देना... लेकिन उन्हें अपने सकारात्मक कर्मों से मुंहतोड़ जवाब देना...
                               कभी ये मत सोचना कि मैं इस चीज के बिना नहीं रह सकती... उस चीज के बिना नहीं रह सकती... जब माता-पिता इस दुनिया में नहीं होते... तो इंसान सर्वाइव कर जाता है... और अगर उसके बिना सर्वाइव कर सकता है तो किसी के बिना भी सर्वाइव कर सकता है... किसी भी व्यक्ति या वस्तु को अपनी कमजोरी मत बनने देना... रिश्तों से... दुःखों से शक्ति लेना... प्यार को अपनी ताकत बनाना... कभी किसी रिश्ते में धोखा मिले तो दुगुने उत्साह से जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत होना... हमेशा खुशी देने की और खुश रहने की कोशिश करना... जीवन में अगर कभी ऐसा मोड़ आए कि लगे कि मेरी जिंदगी बेमानी है तो उनके लिए जीना जो लाचार हैं... गरीब हैं... असहाय हैं... उनकी ताकत बनना ... किसी सक्षम के लिए या उसके कारण आंसू बहाने से अच्छा है कि उसकी ताकत बनो जिसे वाकई तुम्हारी जरूरत है... और हां... सिद्धि एक बात हमेशा याद रखना कि केवल एक चीज है जिसके बिना किसी भी इंसान का जीना नहीं जीने के बराबर है .... वो है सेल्फ रेस्पेक्ट...
                         जिंदगी बहुत खूबसूरत है... उसे नष्ट करने का मत सोचना... कभी किसी बात के लिए दूसरों को दोष मत देना... क्योंकि तुम्हारे साथ वही होगा अच्छा या बुरा कुछ भी... जो तुम खुद के साथ होने देना चाहोगी...
हमेशा खुश रहना... सुखी रहना... तुम्हारी आंखों में कभी आंसू न आए यही मेरी दुआ है... जीवन में खूब सफल हो...
                                              और अंत में........................... अब्राहम लिंकन की एक लाइन.........
                                           ''छेनी और हथौड़ी की चोट खाकर पाषाण (पत्थर) भी देवता बन जाते हैं,
                                            बस शर्त यही है कि कड़ी से कड़ी चोट लगे और वो टूटे नहीं''
सिद्धि जिस दिन तुम्हारी मां इस दुनिया में जिंदा नहीं रहेगी... उस दिन भी मेरे ये शब्द जिंदा रहेंगे... ये उस वक्त तुम्हारा मार्गदर्शन करेंगे जब तुम बड़ी होगी... और किसी दुविधा में होगी....
............................. तुम्हारी मम्मा
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शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

सिद्धि को पहले जन्मदिन पर ढेर सारा आशीर्वाद

सिद्धि मनभावन
तुम आई तो गुलजार हो गया आंगन
सहरा था समंदर हो गया दामन
ममता और स्नेह का ऐसा हुआ उल्लास
जेठ की दोपहरी में मानो आ गया सावन
मुस्कान तेरी देखकर भूल जाता हूं गम अपने
तेरे लिए पल रहे हैं मेरी आंखों में कई सपने
देखकर तुम्हें पुलकित हो उठता है तन मन
बरसों इंतजार के बाद मिली 'सिद्धि' मनभावन




तमन्ना
तितली बनकर आसमां में उड़ना
फूलों पर, पत्तों पर, शाखों पर रहना
खुश्बू बनकर छोड़ जाना अपनी महक
सांसों में घुलकर तुम प्राण बनकर रहना
भरना ऊंची उड़ान बुलंदियों तक
हमेशा खुद पर विश्वास रखना
कामयाबी मिलेगी कदम दर कदम
ऐसा तुम अपना अभिमान रखना
छोटा हो बड़ा हो चाहे कोई और
हर इंसान का तुम सम्मान रखना
मिटती जा रही है रिश्तों से खुशी
तुम अपने कर्तव्यों का ध्यान रखना
लड़खड़ाओ कभी जब राह में अपनी
तो हम पर भरोसा, हमारा मान रखना
हर तरफ फैले तुम्हारी 'सिद्धि'
तुम ऐसा अपना अंदाज रखना




-'पा'

शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

हितेछ अंकल का ग्लीह प्लवेछ

छनिवार 12 फरवरी... को मैं औल मम्मा ज्योति आंती के छाथ हितेछ अंकल के यहां उनके ग्लीह प्लवेछ में गए थे... मुझे वहां थूब मजा आया... ज्योति आंती के छाथ उनके गाली पर थंदी-थंदी हवा खाते हुए खूब मछ्ती छूज लही थी... फिल हितेछ अंकल के घल पर कभी आंती की गोदी में, कभी हितेछ अंकल की गोदी में... तो कभी ज्योति आंती... तो कभी नैना आंती की गोद... छबके छाथ मुझे खूब अच्छा लगा...क्योंकि मम्मा-पापा दोनों के ऑफिछ जाने की वजह छे मुझे ज्यादा मौका नहीं मिलता है बाहल जाने का... लौटते वक्त मेले छल छे तोपी उल गई... तो छल पर ऐसी हवा लगी कि पूछिए मत... मेला तो मन कल लहा था कि बछ लॉन्ग ड्लाइव पल निकल जाऊं... खैल अभी उछमें ताइम है... अभी तो पापा छे गाली भी खलीदवानी है...
अब मैं लिखते-लिखते थक गई... इछलिए बाय बाय...

मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

मैं खूब पढूंगी...

आज मैने वसंत पंचमी की पूजा की। मैने पापा के साथ भगवान गणेश और मां सरस्वती की आराधना की। खास बात बताऊं... पापा ने आज वैदिक मंत्रों के साथ विद्यारंभ भी करवा दिया। मैने डायरी में पहला शब्द 'ऊं भुभूर्व स्वः ' लिखकर मां से ढेर सारा विवेक और बुद्धि मांगा। फिर मैने गणेश और हनुमान जी से कहा कि वो मेरे गुरू बन जाएं। सब भगवान जी ने तथास्तु कह कर मुझे ढेर सारा प्यार किया। अब मैं पापा के साथ खेलने जा रही हूं। बाय...